Saturday, March 13, 2010

सुगंध और स्वाद की पराकाष्ठा

अभी कुछ दिन पहले अख़बार में एक विज्ञापन देखने को मिला,
चार पांच तश्तरियों में सजे हुए बनाना [केला ] स्ट्राबेरी,वेनीला
आदि के फोटोग्राफ थे.जो आकर्षित कर रहे थे . लेकिन यह क्या ?
विज्ञापन एक गर्भ निरोधक बनाने वाली कंपनी का था.
यह क्या हो रहा है . सुगंध की आड़ में दुर्गन्ध फ़ैलाने की साजिश ?
विज्ञापनों के जरिये आदमी को ललचाना ,भटकाना और ठगना एक
आम बात हो गयी है. हमारे यहाँ समस्या से निपटने के लिए ज्यादा
से ज्यादा हम चक्का जाम करते है ,रैली निकालते हैं ,या फिर
मंत्री को ज्ञापन दे आते हैं .
सिर्फ इससे काम नहीं बनेगा , यह हमारी संस्कृति की रक्षा का सवाल है,
हमें अन्दर से अपनी समझ को विकसित करना होगा .समस्या का मूल
कहीं अपने अन्दर ही है . निश्चित ही यह हमारी प्रकृति नहीं सिर्फ
विकृति है जिस पर हम एक न एक दिन जरूर काबू पा लेंगे

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