दीपावली के त्यौहार पर अब वो उल्लास नजर नहीं आता .लोग मनाते है पर एकाकी से .
कहीं कहीं परिवारों ,मोहल्लो में सामूहिक दिपावली मिलन होते हैं परंतु वे सब साथ रहकर भी अलग अलग
से प्रतीत होते हैं डी.बड़ों को धोक देना भी महज एक औपचारिकता सी रह गई है .
जाने-अनजाने संबंधों में पनपी छेटीयां धीरे धीरे दरारों में परिवर्तित हो रही है .
समय बदल रहा है .व्यस्तताएं बढ़ रही है .संबंधों की मिठास पर भी शायद महंगाई का
ग्रहण लग गया है और इस बार मन के भावो में भी मंदी का असर कुछ ज्यादा ही
नजर आया .बहनों के sms मिले भाई-दूज पर .उनका नेक कुरियर से रवाना किया .
मोबाईल on किया ,सर पर दो बार घुमा कर आरती उतारी ,गली के हलवाई की बेस्वाद
मिठाई मुह में डाली और मनाली इ भाई -दूज

