चाहे यह संयोग ही हो ,परन्तु जाने अनजाने में यह विकृत होती मानसिकता को दर्शाता है .अब इस खबर को ही लीजिये , जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर फिल्म कमीने रिलिज .अब यह कोई शुभ अवसर है कमीने फिल्म रिलीज करने का .न तो यह कृष्ण के व्यक्तित्व से मेल खाता है , न उनका इस शब्द के साथ कोई संबंध है . हाँ कई बार न्याय स्थापित करने के लिए उन्होंने कुटिलता का सहारा लिया हो सकता है , वह भी राजनीती के स्तर पर . परन्तु उसका उद्द्देश्य अधर्म का विनाशकर धर्म को स्थापित करना था. हम पर्व इसलिए मनाते हैं की हम उस दिन के महत्व को समझे .उन विभूतियों को याद करें , उनके द्वारा समाज कल्याण के लिए किये गए कार्यों के बारे में जाने .
उन विभूतियों में कृष्ण तो सबसे अनूठे हैं .उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज भी सामयिक है, गीता को ही लीजिये , आज तक संत ज्ञानेश्वर से लेकर लोकमान्य तिलक और कई संत महात्माओं द्वारा अपने प्रवचनों में हजारों बार उसकी व्याख्या करने के बाद भी उसमे से कई गूढ़ अर्थ अभी तक निकल रहे हैं.कृष्ण के जीवन का संतुलन अनुभव करें , उसे सही तरह से ग्रहण करे , और उसी के अनुरूप अपने जीवन को सवारें. तभी हम एक असीम शांति ,जो की एक आंतरिक समृधि है, से भरपूर अपने जीवन को निखार सकेंगे . और तभी हम एकाएक पाएंगे की जीवन का गीत बज उठा , और अंतर्मन मेंकहीं दूर से चैन की बंसी बज उठी.


ब्लाग पर अलग अलग श्रेणिया बना सकते है। धर्म, आध्यात्म, संगीत, फिल्म संगीत आदि और उसके अनुसार अपने विचारो को ब्लाग पर देने से पढ़ने वालो को आसानी होती है।
ReplyDeleteअनुराग तागड़े