Sunday, August 30, 2009

ek kavita

पत्नी के जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ
एक कविता

जिसके साथ मैं अपने दुःख -दर्द बाँट सकता हूँ
जिसके साथ मैं ख़ुशी -प्यार बाँट सकता हूँ
जिस पर मैं गुस्सा निकाल सकता हूँ
जिस पर मैं बिगड़ सकता हूँ
जिस के सामने मैं सारे मुखौटे उतार फेंकता हूँ
जिसके साथ मैं जैसा हूँ ,वैसा ही होता हूँ
जिस पर मैं सब कुछ वार सकता हूँ
जिस पर अपनी सारी जिम्मेदारीयां डालकर
चैन की नींद सो सकता हूँ
जिसकी अचल नींव पर मैं अपनी भाग-दौड़ के
सारे कलश रख सकता हूँ
जिस पर मैं विश्वास कर सकता हूँ
जिसके साथ मैं अर्थ-परमार्थ दोनों स्थलों की
यात्राएं कर सकता हूँ
जिसके बिना जीवन बेकार है
जिसके बिना नीरस संसार है
जिससे हमारे कुल का विस्तार है
जिसके कारण हमारा घर ,घर है
जिस पर मुझे गर्व है

ऐसी मेरी सहचरी ,सखी,पत्नी को
जन्म दिन की शुभकामनाएँ .

2 comments:

  1. अर्थ परमार्थ की यात्राएँ , खूब कहा , हमारी भी शुभ कामनाएं स्वीकार करें

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  2. sunder rachana,bhabhi ji ko janamdin ki bahut badhai

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