नास्तिक तो मैं बिलकुल नहीं ,बल्कि परम आस्तिक हूँ . हाँ ! दिखावा जरूर पसंद नहीं .
आजकल परिवार वाले ,मित्र सभी हंसते हैं ,की मैंने भगवान् को कभी अगरबत्ती नहीं लगाईं
परन्तु शाम होते ही रोज नियम से मच्छरों के लिए अगरबत्ती जरूर लगा देता हूँ .
शायद पुरे प्रदेश में फैले हुए मलेरिया तथा डेंगू के दर से .
सोचता हूँ कण कण मे भगवान ! आखिर मच्छरों में भी तो वे ही बसते हैं


आस्तिकता और उसके दिखावे में बहुत अंतर है ...अपना अपना तरीका है ...अपने अपने विचार ...!!
ReplyDeleteमच्छर मार्ने वाले क्वायल को जलाने पर भी एक लेख हो सकता है, भई वाह!
ReplyDeleteवर्ड वेरिफिकेसन हटा दें तो मेहरबानी हो।
वैसे भगवान और मच्छर में अंतर कोई नहीं है।
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