Monday, November 2, 2009

.आस्तिकता ....

नास्तिक तो मैं बिलकुल नहीं ,बल्कि परम आस्तिक हूँ . हाँ ! दिखावा जरूर पसंद नहीं .
आजकल परिवार वाले ,मित्र सभी हंसते हैं ,की मैंने भगवान् को कभी अगरबत्ती नहीं लगाईं
परन्तु शाम होते ही रोज नियम से मच्छरों के लिए अगरबत्ती जरूर लगा देता हूँ .
शायद पुरे प्रदेश में फैले हुए मलेरिया तथा डेंगू के दर से .
सोचता हूँ कण कण मे भगवान ! आखिर मच्छरों में भी तो वे ही बसते हैं

3 comments:

  1. आस्तिकता और उसके दिखावे में बहुत अंतर है ...अपना अपना तरीका है ...अपने अपने विचार ...!!

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  2. मच्छर मार्ने वाले क्वायल को जलाने पर भी एक लेख हो सकता है, भई वाह!

    वर्ड वेरिफिकेसन हटा दें तो मेहरबानी हो।

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  3. वैसे भगवान और मच्छर में अंतर कोई नहीं है।

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